मैं व्यापारी हूँ, जीवन का व्यापार, करता हूँ मैं। मैं व्यापारी हूँ, जीवन का व्यापार, करता हूँ मैं।
संसार के व्यापार से निर्लिप्तता संसार के व्यापार से निर्लिप्तता
प्रेम जीवन का आधार ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, घृणा प्रेम जीवन का आधार ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, घृणा
व्यापारी सहता बाजार की मार पैसे गिनता बस उसी में है सार फिक्र वक्त की यहां करता कौन है व्यापारी सहता बाजार की मार पैसे गिनता बस उसी में है सार फिक्र वक्त की यहां...
इतने में तो खा लेता, जमकर पूरा परिवार। इतने में तो खा लेता, जमकर पूरा परिवार।
इस दुनिया में प्यार से भी बड़ा है व्यापार। इस दुनिया में प्यार से भी बड़ा है व्यापार।